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Chapter 8

विहान ने आन्या को अपनी तरफ घुमाया और गुस्से में बोला, "तुम हर बार मुझसे भागना चाहती हो। मैंने पहले भी कहा है, तुम मुझसे दूर नहीं जा सकती। मैं एक ही बात को बार-बार रिपीट नहीं करता। जितना जल्दी हो सके, अपने इस छोटे से दिमाग में बैठा लो।"

आन्या: "क्यों कर रहे हो आप ऐसा?"

विहान: "मैंने जो कहा है वो सुनो, ज्यादा सवाल-जवाब मत करो, समझी?"

तभी प्रिया ने आवाज लगाई, "आन्या! कहाँ हो बेटा? मुहूर्त निकल रहा है।"

आन्या: "प्लीज, मुझे छोड़िए। मासी आ जाएगी, क्यों नहीं समझ रहे हैं आप?"

विहान आन्या को छोड़ ही नहीं रहा था। आन्या ने झटके से पूरा दम लगाकर विहान को धक्का दिया और वहाँ से भाग गई। विहान ने शैतानी मुस्कान के साथ कहा, "भाग लो जितना भागना है, आखिर लौट के मेरे पास ही आओगी।"

कमरा नंबर 405। अक्षरा की नींद खुली तो उसने खुद को निर्वस्त्र पाया, जिससे उसकी आँखों में खून उतर आया। उसने उसी हालत में चिल्लाया, "विहान! मैं तुम्हें छोड़ूँगी नहीं। तुमसे जो अटैच्ड है, उसे मैं बर्बाद कर दूँगी। वेट एंड वॉच।"

ऋषभ: "बेबी, आज तुम कयामत लग रही हो।"

मायरा: "तुम भी कम हैंडसम नहीं लग रहे।"

ऋषभ ने आँख मारी।

सब हल्दी की रस्म में व्यस्त थे। रिसॉर्ट में उसी वक्त एक शख्स आया, उसने व्हाइट कोट-पेंट पहना था। उसकी हाइट लगभग 6 फीट थी, देखने में हैंडसम और गुड-लुकिंग था। उसका नाम कबीर मेहरा था।

आन्या उसके पास दौड़कर आई और बोली, "रैबिट, तुम यहाँ?"

कबीर: "अरे छिपकली, तुमने मुझे पहचान लिया? कितने दिनों बाद मिले हैं हम।"

मायरा भी आई और तीनों ने ग्रुप हग किया। विहान को यह सब देखकर बहुत गुस्सा आ रहा था, उसने अपने हाथों की मुट्ठी बना ली। ऋषभ ने पूछा, "क्या हुआ तुझे?"

विहान ने ऋषभ को कोई जवाब नहीं दिया और एकदम शांत था।

ऋषभ: "कुछ बोलेगा?"

विहान ने जोर से टेंट वाले पिलर पर मारा, जिससे सारा टेंट गिर गया। सब विहान को देख रहे थे। जब विहान ने सबका ध्यान अपनी तरफ पाया, तो उसने इधर-उधर देखा।

विहान: "सॉरी गाइज।" और वह चला गया। ऋषभ विहान को देखते रहा।

सबने मायरा और ऋषभ को हल्दी लगाई। आन्या मायरा और ऋषभ को स्विमिंग पूल की तरफ ले गई और बोली, "जीजू, हम एक गेम खेलते हैं, ओके?"

ऋषभ: "कौन सा गेम, आन्या?"

आन्या: "बस आप देखो जीजू।" इतना बोलते ही ऋषभ को धक्का दे दिया।

वहाँ खड़े सब लोग हँसने लगे। आन्या: "जीजू, आप दी को कैच करो।" फिर मायरा को धक्का दे दिया, ऋषभ ने जल्दी से मायरा को पकड़ लिया। कबीर ने आन्या को पूल में गिरा दिया, आन्या को तैरना नहीं आता था। विहान सब विंडो से देख रहा था और वाइन पी रहा था।

कबीर ने तुरंत पूल में छलांग लगाई और आन्या को बचा लिया। आन्या बेहोश हो चुकी थी। सारे लोग रेस्ट करने चले गए थे। कबीर: "अरे छिपकली, उठ जा ना, प्लीज उठ जाओ न यार।"

मायरा जल्दी से आन्या के पास आई और बोली, "आन्या, उठ जाओ बेटा। यह शायद बेहोश हो गई है, तुम इसे रूम में ले जाओ और आगे का फंक्शन जब होगा, तब इन्फॉर्म करके नीचे बुला लूँगी।"

कबीर ने आन्या को अपनी बाहों में उठाया और रूम में ले गया। विहान की आँखें इस वक्त लाल हो चुकी थीं और वह बेड पर बैठा था। उसने खुद को रिलैक्स किया और बोला, "आन्या बेबी, तुम सिर्फ मेरी हो। यह जो भी है, हम दोनों के बीच नहीं आ सकता। मैं तुमसे प्यार नहीं करता आन्या, लेकिन तुम्हें किसी और के साथ देख भी नहीं सकता।"

कबीर ने आन्या को बेड पर सुलाया, उसके सिर पर हाथ फेरा और कहा, "सॉरी आन्या, मुझे नहीं पता था, लेकिन अब उठ जाओ न प्लीज।"

मायरा आन्या के रूम में आती है और कहती है, "कबीर बेटा, टेंशन मत लो, आन्या बिल्कुल ठीक है, बस पानी में गिरने से यह सब हो गया। तुम, मायरा और आन्या तीनों बचपन के फ्रेंड्स हो। आन्या जब पुणे आती है, तुमसे मिलकर ही जाती है। अभिरा जी (कबीर की माँ) ने बताया था तुम काम के सिलसिले से बाहर गए हो। तुम अब इस वक्त कैसे?"

कबीर: "आंटी, मायरा ने मुझे मैसेज किया था, वो बोली तुम्हें एक खास मेहमान से मिलवाऊँगी। जल्दी से आओ और मायरा की शादी भी थी, तो मैंने सोचा आ जाऊँ।"

मायरा: "ठीक किया तुमने कबीर। आन्या और तुम्हारी बॉन्डिंग बहुत अच्छी है, उसे शायद तुम्हारी ही जरूरत थी।"

कबीर ने मन में कहा, "आई लव यू आन्या, मैं तुम्हें बचपन से ही पसंद करता हूँ, पर मैंने तुम्हें कभी नहीं बताया। कभी नहीं खो सकता तुम्हें मैं।"

दोनों रूम से चले जाते हैं। आन्या के रूम में एक और शख्स आया और उसके बगल में बैठ गया। उसके हाथों को थाम के कहा, "आन्या, तुम उससे चिपकी हुई क्यों थी? कौन लगता है तुम्हारा वो? मुझसे तो दूर भागती हो।" आन्या के फोरहेड पर किस किया।

आन्या की आँखें धीरे-धीरे खुलीं, उसने अपने पास विहान को पाया। उसने जैसे ही चिल्लाना चाहा, विहान ने तुरंत उसके मुँह पर अपना हाथ रख दिया।

विहान: "रिलैक्स बेबी, मुझे देख इतना हाइपर क्यों हो जाती हो?"

आन्या: "हम्मममम..."

विहान ने अपना हाथ हटाया।

आन्या: "फिर आप आ गए? क्या चाहिए आपको मेरे से?"

विहान: "तुम।"

आन्या: "क्या?"

विहान: "हाँ, तुमने सही सुना। तुम चाहिए मुझे।"

आन्या: "ये कैसे हो सकता है और मैं आपके पास नहीं रहना चाहती। क्यों रहूँ मैं आपके पास?"

विहान: "बहुत बोलती हो जान तुम।"

आन्या: "मैं चिल्ला दूँगी, अभी मेरे रूम से जाइए आप।"

विहान उसकी तरफ झुकते हुए कहा, "चिल्लाओ।" आन्या ने आँखें जोर से बंद कर लीं।

आन्या के रूम में कबीर आया और बोला, "आन्या, तुम ठीक हो न? अब चलो नीचे सब वेट कर रहे हैं।"

आन्या ने आँखें खोलीं, विहान वहाँ नहीं था।

कबीर: "हेलो आन्या, कहाँ खोई हो?"

आन्या: "नहीं, कुछ नहीं।" (मन में कहा, "लगता है मैंने सपना देखा, सब, ये मेरे सपनों में भी आने लगे हैं।")

आन्या कबीर के साथ नीचे चली जाती है। विहान कर्टन्स (पर्दे) के पीछे छुपा हुआ था। वह भी बाहर आया और नीचे चला गया। मेहंदी की तैयारी चल रही थी, मायरा ने अपने हाथों में ब्राइड मेहंदी लगाई हुई थी। ऋषभ मायरा की हथेली पर अपना नाम लिख रहा था। आन्या ने भी मेहंदी लगाना चाहा, तभी विहान आ गया और एक मेहंदी उठा ली। सब मेहंदी फंक्शन में बिजी थे। कबीर भी किसी से बात कर रहा था। विहान आन्या को साइड में ले जाता है।

विहान: "मेरे होते हुए अपने इस छोटे से हाथ पे किसका नाम लिखोगी?"

आन्या ने जोर से विहान को धक्का दिया और "सब गलत है, समझे आप" बोलकर वहाँ से जाने लगी। विहान ने उसका हाथ टाइटली पकड़ के उसकी बैक पे सटा दिया और बोला, "चुपचाप से जो मैं कर रहा हूँ, करने दो। जो मैं असल में हूँ, उसे बनने के लिए मजबूर मत करो।"

आन्या (रोने लगी): "मुझे दर्द हो रहा है, छोड़िए मेरा हाथ।"

विहान जब देखा तो उसे एहसास हुआ और उसने आन्या का हाथ छोड़ दिया। आन्या का चेहरा इस वक्त छोटी सी बेबी जैसा लग रहा था। उसके लिप्स थरथरा रहे थे। विहान को आन्या काफी अट्रैक्टिव लग रही थी, उसने आन्या के लिप्स पे अपने लिप्स रख दिए। विहान काफी सॉफ्टली किस कर रहा था, जैसे अपना सारा प्यार बयां कर रहा हो।

Milte h cutie 🥰 next chapter mein baa byyy💋💋💋 like and comments

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