विहान अन्या से दूर हुआ, उसका हाथ आगे करके मेहंदी से अपना नाम लिखा। अन्या, जो तब से विहान को देख रही थी, उसकी नज़रें अपने हाथ पर गईं। अन्या ने बड़ी-बड़ी आँखें करके विहान को देखा।
विहान: "क्या हुआ अन्या बेबी?"
अन्या: "मैं बार-बार एक ही सवाल पूछ रही हूँ, प्लीज बता दीजिए क्यों कर रहे हैं आप? और यह अपना नाम क्यों लिखा है, कोई देख लेगा।"
विहान: "अब यह तो मुझे भी नहीं पता कि मैं क्यों कर रहा हूँ।"
इतना बोलकर वह वहाँ से चला जाता है। ऋषभ और मायरा के हाथ में मेहंदी लग चुकी थी।
मायरा: "ऋषभ, तुम्हें सुहागरात में अपना नाम ढूँढ़ना है, मैं पहले ही बता देती हूँ। उसके बाद ही कुछ हमारे बीच..."
ऋषभ उसकी तरफ झुकते हुए बोला, "क्या! नाम क्यों ही ढूँढ़ना है, तुम तो मेरा नाम जानती ही हो न डार्लिंग।"
मायरा उसे धकेलते हुए बोली, "नहीं होने वाले पतिदेव जी, करना तो होगा।"
ऋषभ: "पता नहीं अब क्या होगा हमारी सुहागरात का।"
कबीर: "अरे छिपकली, तुम्हारा मुँह इतना सड़ा हुआ क्यों है?"
अन्या: "नहीं तो।"
कबीर ने मेहंदी उठाई और कहा, "अन्या, अपना हाथ इधर दो।"
अन्या डरते हुए मन में सोचने लगी—कबीर ने कहीं देख तो नहीं लिया?
कबीर: "दो ना।"
अन्या अपना बायाँ हाथ आगे करती है, फिर बोली, "लेकिन क्यों? क्या करना है?"
कबीर: "बचपन याद है क्या करते थे?"
अन्या सिर ना में हिलाते हुए बोली, "नहीं याद है मुझे, सॉरी।"
कबीर: "कोई बात नहीं, मैं लाइव दिखा देता हूँ।" उसने अन्या के हाथ में अपना नाम लिख दिया।
अन्या हैरान रह गई।
कबीर: "ऐसे क्या देख रही हो? अच्छा मैं समझ गया," (सिर पर हाथ फेरते हुए) "राइटिंग अच्छी है न मेरी?" 😁
अन्या: "अब तुम भी..."
कबीर: "क्या 'तुम भी'? मैं समझा नहीं।"
अन्या: "मतलब बहुत अच्छा है। जाऊँ अब?"
कबीर साइड हटते हुए बोला, "जाइए मैडम।"
मीरा दोनों को देखकर हँसती है और बोली, "लगता है अगला नंबर इनका है। कबीर बहुत ही अच्छा लड़का है, अन्या को बहुत खुश रखेगा।" फिर वह कबीर के पास गई।
मीरा: "कबीर बेटा, अन्या तुम्हें कैसी लगती है?"
कबीर अपने खयालों में खोया हुआ था और बोला, "बहुत अच्छी! कोई भी लड़की anya के जैसी है ही नहीं। आई लव यू अनन्या।"
मीरा अपनी हँसी को कंट्रोल करके बोली, "अच्छा, ऐसी बात है क्या?"
कबीर होश में आया और बोला, "आंटी आप!"
मीरा: "क्यों, क्या हुआ? नहीं आ सकती क्या मैं?"
कबीर: "सॉरी आंटी, मतलब..."
मीरा: "तो अपने दिल की बात कब बता रहे हो अन्या को?"
कबीर की खुशी का तो ठिकाना ही नहीं था।
कबीर: "रियली आंटी! आप ऐसा चाहती हैं? थैंक यू, थैंक यू!" और जल्दी से मीरा के गले लग गया।
मीरा: "बस, बस। अब अन्या को तुम अपने दिल की बात बताओ और मैं सबसे बात करती हूँ तुम दोनों के बारे में।" और वह चली जाती है।
अन्या अपने वॉशरूम में थी। उसने शावर ऑन किया, वहीं बैठ गई और रोते हुए कहा, "क्यों... क्यों हो रहा है मेरे साथ ऐसा? एक वह और दूसरा कबीर... मुझे नहीं रहना!"
विहान ने नीचे देखा, अन्या कहीं नहीं थी। वह उसके कमरे में गया, इधर-उधर देखा, अन्या कहीं नहीं थी। वह जाने के लिए मुड़ा, लेकिन रुक गया और वॉशरूम की तरफ देखने लगा। फिर दरवाज़ा खटखटाने लगा।
अन्या: "कौन?"
विहान: "दरवाज़ा खोलो।"
अन्या: "प्लीज, मुझे अभी नहीं आना।"
विहान: "मैंने जो कहा तुम वह सुनो।"
Anya डर जाती है और अपने आप को देखा तो पूरी भीगी हुई थी। उसने उसी हालत में दरवाज़ा खोला। विहान ने जब देखा तो वह हैरान रह गया।
विहान: "यह क्या हाल बना रखा है?"
अन्या: "वह... शावर बंद नहीं हो रहा था, इसलिए यह सब हो गया।"
विहान: "रो रही थी तुम?"
अन्या: "नहीं, मुझे ठीक नहीं लग रहा है, मैं आराम करना चाहती हूँ।" (उसे ठंड लग रही थी)।
विहान: "ठीक है, तुम आराम करो, मैं तुमसे बाद में बात करता हूँ।"
सब लोग रिसॉर्ट से जा रहे थे, फंक्शन खत्म हो चुका था। मायरा, अन्या के कमरे में आई और बोली, "क्या हुआ तुम्हें? इस तरह सोई क्यों हो?"
अन्या: "वह ठंड लग रही थी मुझे, बस।"
मायरा: "कभी-कभी होता है। सब घर जा रहे हैं, फंक्शन खत्म हो गया है। जो भी सामान है जल्दी से पैक करो और चलो, माँ बुला रही हैं।"
अन्या जल्दी से हाँ करती है और तुरंत बोली, "चलो, मैंने सारा सामान पैक कर लिया है।"
दोनों नीचे चले जाते हैं। अभिमन्यु और ऋषि एक-दूसरे से गले मिलते हैं और बोले, "ठीक है भाई साहब, आगे भी सब अच्छे से हो जाए बस। अब मैं इजाज़त चाहता हूँ।"
सब लोग कार में बैठ चुके थे। विहान ने अन्या को देखा। कबीर जल्दी से बोला, "मीरा आंटी, मैं अन्या को ड्रॉप कर देता हूँ।"
मीरा: "ठीक है, तुम दोनों आ जाना।"
सबकी कार जा चुकी थी, बस विहान, कबीर, ऋषभ और अन्या थे। कबीर ने कार का दरवाज़ा खोला और बोला, "बैठो।"
अन्या ने एक तरफ नज़र विहान पर डाली और बैठ गई। विहान को यह सब देखकर बहुत गुस्सा आ रहा था।
ऋषभ: "एक बात बोलूँ तुझे?"
विहान: "हूँ..."
ऋषभ: "कहीं तू अन्या को पसंद तो नहीं करता?"
विहान: "पता नहीं, लेकिन बस वह मेरी है! और यह कौन था?"
ऋषभ: "अन्या और मायरा का बचपन का दोस्त। विहान, एक और बात... तुम अन्या के साथ जो भी कर रहे हो, यह ठीक नहीं है। मैंने नोटिस किया था, अन्या बाकी लड़कियों जैसी बिल्कुल भी नहीं है, इसलिए थोड़े अच्छे से पेश आओ। मैंने तुम्हें क्लब वाले दिन सारी बात बता दी थी, उसके माँ-बाप भी नहीं हैं इस दुनिया में... तो ध्यान से, उसे बस चोट मत पहुँचाना, वरना..."
विहान उसकी तरफ घूरकर देखता है और बोला, "क्या वरना?"
ऋषभ: "वह मेरी साली है, तुम भी बस याद रखना।"
विहान और ऋषभ कार में बैठकर हवेली (मैनशन) के लिए निकल जाते हैं।
Milte hai guys next chapter mein baa byeee💋💋💋💋 like and comment
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